तर्ज : देखकर सहारा श्याम म्हाने उबारो।

स्थाई –
1. करके कृपा बनो श्याम सहायी
थारो ही लियो अब शरणो की सहायी।

2. गर न दोगे शरणो थारो
फिर किया होसी गुजारो म्हारो
देव कृपालु थे हो कृपा दिख लाओ।

3. बिसराओगे जे थे म्हाने
डूबेंरा हां और डुबांगा,
मझधारा सु अब म्हाने उबारो।

4. शीश के दानी साथी हारे के,
हारे हुए को जीत दिला दो
तुम से ही है म्हाने आस भारी।

5. धीरज धीर क्या राखे,
सगला खींचे पग्या म्हारी,
देव दयालु थे हों कृपा बरसा दो।

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