।।श्रीहरि:।।

तर्जः- दिल दीवाना बिन सजना के माने ना..

आ गई ग्यारस श्याम प्रभु की
चलो ना…….2
65 में सज-धज के बैठा है
सांवरिया……….2

1. जगमग जगमग ज्योत जगी है
फूलों से सजा है बाबा
ओ…. हो….. आ……..
जगमग जगमग ज्योत जगी है
फूलों से सजा है बाबा….. 2
महके दरबार इत्र से
श्याम प्रभु का प्यारा….2
मोरछड़ी का ले के झाड़ा
चलो ना……….
65 मे सज-धज के बैठा है सांवरिया…………

2. दुखियों के दुःख दूर करने
कष्टों को मिटाने……2
रोगी को निरोगी करने
बिगड़े काम बनाने………..2
हाथों में ध्वजा श्याम की
उठा लेना……..
65 में सज-धज के बैठा है सांवरिया…………

3. जो भी मांगे मिले उसी को
जो श्रद्धा से आए………2
शीश झुका ले शीश दान के
आगे पल्लू बिछा ले………2
ऐसा देव दयालु दूजा
कोई ना………..
65 में सज-धज के बैठा है सांवरिया……..

3. ग्यारस को सोलह कला में
रहता है सांवरिया……….2
वचन दिया है निज भगत को
खाली न जाए सवाली
“धीरज” सच्चे दर पे शीश
झुका लेना………..
65 में सज-धज के बैठा है सांवरिया……

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