।। श्री हरि:।

तर्ज:- फूलों सा चेहरा तेरा कलियों की मुस्कान है।

छम-छम नाचे लीला तेरा मस्ती भक्तों पे छाई है
दर सजा देख के ज्योत तेरी लेय के
कीर्तन की रात आई है…………।

सुंदर सलोना मुखड़ा है प्यारा,
मुकुट की आभा की क्या शान है,,
मोर किलंगी गल फूल माला,
इत्र की खुशबू की क्या बात है,,
भक्त मगन हो के झुमे नाचे गाए,
सबके जुबां पे तेरा नाम है,,
अरे……….प्रेम भरी आँखें तेरी, भजनों की छाई ऐसी बहार है,,
दर सजा देख के……..

भजनों की मस्ती ऐसी मदहोशी,
छाई तरंग दिल पे कैसी है,,
प्रेम बढ़ाने तुमको रिझाने,
करने दिल की बात आए हैं,,
बिगड़ी संवर जाए जयकारा जो लगाए,
खुशियां छा जाए जिंदगानी में,
कोई नहीं ऐसा देव तुमसा दानी,
देता जो भक्तों छप्पर फाड़ के
अरे……….चहुं ओर है मस्ती भरी, प्रेमियों का अनोखा भाव है
दर सजा देख के……..

“धीरज” रिझाएंगे श्याम मना ले,
चाहे जो ले ले दरकार है,,
ताली बजा ले ठुमका लगा ले,
नाच दिखा दे मेरे बाबा को,.
सब संभव होगा जो तु चाहेगा,
एक बार दिल लगा ले श्याम से,,
हारा है फिर भी न डर,
हारे का साथी साथ है,,
दर सजा देख के……..

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